Prayagraj : रेस्टोरेंट में दम घुटने से एक कर्मचारी की मौत, पांच के अचेत मिलने से हड़कंप

जिले के दारागंज थाना इलाके में श्री राम भोजनालय के पांच कर्मचारियों के अचेत अवस्था में मिलने से हड़कंप मच गया. घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने सभी को अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने एक कर्मचारी को मृत घोषित कर दिया .

जबकि बाकि चार का निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है. मृतक की पहचान मोनू शर्मा के रूप में हुई है. बताया जा रहा है कि भोजनालय के मालिक राजेंद्र प्रसाद के बेटे की शुक्रवार को शादी है.

इसी वजह से सभी कर्मचारियों ने मिलकर गुरुवार की रात पार्टी की और भट्टी बुझाए बिना बेसमेंट में जाकर सो गए थे. भोजनालय बंद होने की वजह से अंदर सो रहे कर्मचारी ऑक्सीजन की कमी की वजह से अचेत हो गये.

इसके बाद शुक्रवार को दिन में देर तक भोजनालय नहीं खुला तो लोगों ने अंदर जाकर देखा तो कर्मचारी अचेत पड़े हुए थे. मामले की सूचना पुलिस को दी गई.

भोजनालय में एक साथ पांच कर्मचारियों के बेसुध होने की जानकारी मिलते ही मौके पर पुलिस पहुंच गई और मामले की जांच पड़ताल करने में जुट गई.

शुरुआती जांच में पता चला कि भट्टी जलती हुई छूट गई, जिस कारण दम घुटने की वजह से कर्मचारी बेसुध हो गए थे. हालांकि पुलिस ने मृत कर्मचारी के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है.

इसके साथ ही पुलिस मामले की तफ्तीश करने में जुटी हुई है. पुलिस इस बात का भी पता लगा रही है कि जलती हुई भट्टी छूट जाने की वजह से ही ऐसा हुआ है या घटना के पीछे और कोई वजह है.

रेस्टोरेंट के मालिक राजेंद्र प्रसाद वैश्य हैं जो ऊपर के तल पर परिवार समेत रहते भी हैं। भूतल पर रेस्टोरेंट का संचालन होता है। यहां मोनू के अलावा उसका भाई सोनू, मुनिराज निवासी रीवा, शशि निवासी झारखंड, प्रदीप यादव निवासी फूलपुर व शिवशंकर निवासी महाराष्ट्र काम करते हैं।

दारागंज में जीटी जवाहर चौराहे पर स्थित श्रीराम भोजनायलय एवं स्वीट्स रेस्टोरेंट में पांच मजदूरों केअचेत पड़े मिलने से सनसनी फैल गई। सभी को अस्पताल पहुंचाया गया जहां मोनू शर्मा (30) ने दम तोड़ दिया।

हताहत लोगों में शामिल मुनिराज पटेल की हालत गंभीर होने केकारण उसे एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जबकि डॉक्टरों ने तीन अन्य शशि, शिवशंकर व प्रदीप की हालत खतरे से बाहर बताई है।

रेस्टोरेंट के मालिक राजेंद्र प्रसाद वैश्य हैं जो ऊपर के तल पर परिवार समेत रहते भी हैं। भूतल पर रेस्टोरेंट का संचालन होता है। यहां मोनू के अलावा उसका भाई सोनू, मुनिराज निवासी रीवा, शशि निवासी झारखंड, प्रदीप यादव निवासी फूलपुर व शिवशंकर निवासी महाराष्ट्र काम करते हैं।

बृहस्पतिवार रात 2.30 बजे के करीब काम खत्म होने के बाद सभी बेसमेंट में बने किचन में ही सो गए।

शुक्रवार सुबह 10 बजे तक कोई बाहर नहीं निकला तो अन्य कर्मचारी जगाने पहुंचे। लेकिन दरवाजा भीतर से बंद मिला। घंटों कोशिश के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला।

इसके बाद दरवाजा तोड़ा गया तो मजदूर अचेत पड़े मिले। सूचना पर पुलि जहां हालत गंभीर देख मोनू व मुनिराज को एसआरएन रेफर कर दिया गया।

लेकिन वहां मोनू को मृत घोषित कर दिया गया। जबकि मुनिराज को भर्ती कर लिया गया। सीओ दारागंज आस्था जायसवाल ने बताया कि फिलहाल मामले में किसी पक्ष की ओर से कोई तहरीर नहीं मिली है।

जलता छोड़ दिया था तंदूर

जानकारी पर दारागंज पुलिस के साथ ही अफसर भी मौकेपर पहुंचे। जांच पड़ताल में पता चला कि मजदूरों ने रात में सोते वक्त तंदूर जलता हुआ छोड़ दिया था।

आशंका जताई जा गई कि तंदूर जलता रहने और दरवाजा बंद होने के कारण कमरे में गैस भर गई और इसकी चपेट में आने से मजदूर अचेत हो गए।

इसी दौरान मोनू की मौत हो गई। सोनू दरवाजे से कुछ दूर पर था, ऐसे में उस पर गैस का असर कम हुआ और वह जल्द होश में गया।

बेटे की थी शादी

मौके पर पहुंचकर पुलिस अफसरों ने पूछताछ शुरू की तो पता चला कि शाम को रेस्टोरेंट मालिक के बेटे विशाल की बारात जानी है। यही वजह थी कि शुक्रवार को रेस्टोरेंट बंद भी रखा गया था।

यह भी बात सामने आई कि आमतौर पर सभी सुबह आठ बजे तक उठ जाते हैं। लेकिन शादी के चलते रेस्टोरेंट बंद था, यही वजह थी कि  मालिक व अन्य मजदूर यही सोचते रहे कि सभी अभी सो रहे होंगे

फूड प्वॉइजनिंग का शोर

इससे पहले खबर फैली कि फूड प्वॉइजनिंग से पंाच मजदूर अचेत हो गए हैं। जिसके बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम भी मौकेपर पहुंच गई। टीम ने वहां मौजूद खाद्य पदाथों केनमूने भी एकत्र किए। खाद्य सुरक्षा अधिकारी केके त्रिपाठी ने बताया कि नूमनों को जांच के लिए भेजा जाएगा।

आंख खुली तो खुद को पाया अस्पताल में

सरदार पटेल संस्थान में भर्ती शशि ने बताया कि रात में खाना खाने के बाद वह और उसके साथी किचन में ही सो गए थे। इसके बाद क्या हुआ, कुछ पता नहीं। आंख खुली तो खुद को अस्पताल में पाया। इसी तरह प्रदीप ने बताया कि रोजाना सोने से पहले तंदूर की आग को बुझा लिया जाता है। लेकिन बृहस्पतिवार रात गलतफहमी हो गई। सभी यही सोचते रहे कि उसके साथी ने आग बुझा ली होगी और इसी में तंदूर जलता रह गया।

तंदूर का धुआं ही उसके लिए काल बन गया

मृतक मोनू के शव का पोस्टमार्टम शाम को हुआ। इसमें दम घुटने से मौत की बात सामने आई है। जिससे माना जा रहा है कि तंदूर का धुआं ही उसके लिए काल बन गया। उधर भाई की मौत पर सोनू बिलखता रहा। घटना की सूचना मिलने पर शाम को अन्य परिजन भी आ गए। मृतक के परिवार में पत्नी दीपा व एक बच्चा है।

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