Prayagraj Surgeon Conference 2023 : रोबोटिक सर्जरी की ओर बढ़ रहा मेडिकल साइंस

इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के कांफ्रेंस हाल में चल रहे यूपीएमएएसआईसीओएन (एसोशिएसन ऑफ सर्जन इंडिया मध्य यूपी चैप्टर सम्मेलन) फर्स्ट यूपीमैसिकॉन-2023 में शिरकत करने पहुंचे देश के जाने-माने शल्य चिकित्सकों ने अपने अनुभव साझा किए। साथ ही कांफ्रेंस में हिस्सा ले रहे जूनियर डॉक्टरों को सर्जरी की नई विधा से अवगत कराया। कांफ्रेंस में करीब 800 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और अपने अनुभवों को साझा किया।

आयोजन में मुख्य रूप से रोबोटिक सर्जरी पर चर्चा की गई। लेजर और लेप्रोस्कोपी सर्जरी के बाद अब शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में रोबोटिक सर्जरी की विशेष तौर पर जानकारी दी गई। कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. वैभव श्रीवास्तव ने बताया कि चिकित्सा के क्षेत्र में रोज नए नए अनुसंधान और प्रयोग हो रहे हैं। इसी कड़ी में रोबोटिक सर्जरी की नई विधा ईजाद की गई है जो काफी कारगर साबित हो रही है।

अभी तक हम लेप्रोस्कोपिक और लेजर विधि से सर्जरी कर रहे थे, लेकिन समय की मांग को देखते हुए अब रोबोटिक सर्जरी की ओर बढ़ रहे हैं।
हमारी कोशिश है कि बेसिक सर्जरी और नई विधि रोबोटिक सर्जरी के समन्वय से मरीजों को अधिक से अधिक सुविधा प्रदान की जाए। जूनियर डॉक्टरों को बताया गया कि बेसिक सर्जरी के टॉपिक को कवर करने के साथ ही नई विधा का भी प्रयोग करें, क्योंकि आने वाला समय नई तकनीकि का ही है। हमें समय के साथ आगे बढ़ना है और परंपरागत विधि को भी साथ रखना है।

बिना चीर-फाड़ के थॉयरायड निकाले की विधि पर चर्चा

मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज प्रयागराज के प्रोफेसर ऑफ सर्जरी डॉ. प्रबल नियोगी ने बताया कि कांफ्रेंस में जूनियर डॉक्टरों को सर्जरी की नई विधा के बारे में विस्तार से बताया गया है। टांके कैसे लगाए जाते हैं और नलियां किस तरह से जोड़ी जाती हैं आदि टॉपिक पर गहराई से जानकारी दी गई। बिना चीर फाड़ के थॉयरायड निकालने की भी विधा बताई गई। यहां पर करीब 800 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

यूपी और  उत्तराखंड ही नहीं देश के जाने माने मेडिकल संस्थानों से छात्रों ने हिस्सा लिया और सीनियर कंसल्टेंट के अनुभवों का लाभ उठाया। जिन्हें लेप्रोस्कोपी और लेजर विधि के बाद नई तकनीक रोबोटिक सर्जरी के बारे में बताया गया। सर्जिकल के क्षेत्र में क्या नई पद्धतियां आई हैं और क्या नया आना चाहिए इस पर भी मंथन किया गया।

सर्जरी से दूर किया जा रहा मोटापा


संजय गांधी पीजीआई के डॉ. अवधेश कुमार ने मोटापे की सर्जरी की जानकारी दी। कहा कि यह नई चिकित्सा पद्धति है। दूरबीन विधि से मोटापे की सर्जरी की जा रही है। मोटापा इस समय सामान्य रोग हो गया है। आरामदेह जीवन शैली और मेहनत न करने के कारण यह रोग सामान्य हो गया है जिससे कई रोगों का खतरा बढ़ जाता है। मोटापे को दूर करने के लिए सर्जरी की निई विधा ईजाद की गई है। अभी तक पांच साल के भीतर करीब 25 लोगों की मोटापे की सफल सर्जरी की जा चुकी है। इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है।

बिना चीरा लगाए घेंघा का किया जा रहा सफल उपचार

केजीएमयू लखनऊ के डॉ. कुशाग्र गौरव भटनागर ने घेंघा रोग के बारे में जानकारी दी। बताया कि हिमालय की तराई के इलाकों गोंडा, बस्ती, बहराई, गोरखपुर आदि जिलों में यह बहुत सामान्य रोग है। हर बार मानसून के बाद जो बारिश होती है। उसके बाद जमीन के अंदर को जो ऑयोडीन होता है वह जमीन की ऊपरी सतह पर आ जाता है। इसमें उपजने वाले अनाज को खाने से घेंघा रोग की संभावना बढ़ जाती है।

मेडिकल साइंस में अब इसकी सर्जरी की तकनीक आ गई है। गले में चीरा लगाकर इसको ठीक किया जाता है। अब नई तकनीक दूरबीन विधि से बिना चीरा लगाए भी आपरेशन होगा। इससे गले पर निशान भी नहीं पड़ेगा। दो दिन में मरीज की छुट्टी भी हो जाती है। प्राइवेट अस्पताल में इसका खर्च दो से ढाई लाख आता है, लेकिन केएजीएमयू सहित सरकारी अस्पतालों में सामान्य खर्च चार से पांच हजार रुपये ही लगता है। अगर आयुष्मान कार्ड या कोई मेडिकल इंश्योरेंस है तो बिना पैसे के भी उपचार हो जाएगा। 

रोबोटिक सर्जरी क्या है

रोबोटिक सर्जरी, जिसे रोबोट-असिस्टेड सर्जरी भी कहा जाता है, डॉक्टरों को पारंपरिक तकनीकों की तुलना में कई प्रकार की जटिल प्रक्रियाओं को अधिक सटीकता, लचीलेपन और नियंत्रण के साथ करने की अनुमति देती है। रोबोटिक सर्जरी आमतौर पर न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी से जुड़ी होती है – छोटे चीरों के माध्यम से की जाने वाली प्रक्रियाएं। इसका उपयोग कभी-कभी कुछ पारंपरिक खुली सर्जिकल प्रक्रियाओं में भी किया जाता है।

सबसे व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली क्लिनिकल रोबोटिक सर्जिकल प्रणाली में एक कैमरा आर्म और मैकेनिकल आर्म्स शामिल हैं जिनके साथ सर्जिकल उपकरण जुड़े होते हैं। सर्जन ऑपरेटिंग टेबल के पास कंप्यूटर कंसोल पर बैठकर बाहों को नियंत्रित करता है। कंसोल सर्जन को सर्जिकल साइट का एक उच्च-परिभाषा, आवर्धित, 3डी दृश्य देता है। सर्जन टीम के अन्य सदस्यों का नेतृत्व करता है जो ऑपरेशन के दौरान सहायता करते हैं।

रोबोटिक सर्जरी क्यों की जाती है

रोबोटिक प्रणाली का उपयोग करने वाले सर्जन पाते हैं कि कई प्रक्रियाओं के लिए यह ऑपरेशन के दौरान सटीकता, लचीलेपन और नियंत्रण को बढ़ाता है और उन्हें पारंपरिक तकनीकों की तुलना में साइट को बेहतर ढंग से देखने की अनुमति देता है। रोबोटिक सर्जरी का उपयोग करके, सर्जन नाजुक और जटिल प्रक्रियाएं कर सकते हैं जो अन्य तरीकों से कठिन या असंभव हो सकती हैं।

अक्सर, रोबोटिक सर्जरी न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी को संभव बनाती है। न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी के लाभों में शामिल हैं:

 कम जटिलताएँ, जैसे सर्जिकल साइट संक्रमण
 कम दर्द और खून की कमी
 कम समय तक अस्पताल में रहना और जल्दी ठीक होना
 छोटे, कम ध्यान देने योग्य निशान

जोखिम

रोबोटिक सर्जरी में जोखिम शामिल होता है, जिनमें से कुछ पारंपरिक ओपन सर्जरी के जोखिमों के समान हो सकते हैं, जैसे संक्रमण और अन्य जटिलताओं का छोटा जोखिम।
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